हार्मोन थेरेपी लेने वाली महिलाएं हो जाइए सावधान, हो सकता है स्तन कैंसर

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हार्मोन थेरेपी का एक दुष्परिणाम सामने आया है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) के लक्षणों से राहत पाने की इस थेरेपी से कुछ हद तक स्तन कैंसर का खतरा पाया गया है। यह बात दूसरे अध्ययनों से भी स्थापित हो चुकी है। लेकिन नए अध्ययन में पहली बार यह पाया गया कि उपचार बंद होने के दस साल बाद भी इस बीमारी का खतरा बरकरार रहता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, विभिन्न प्रकार की मीनोपॉज हार्मोन थेरेपी (एमएचटी) की मात्रा और इनके इस्तेमाल की समयसीमा भी स्तन कैंसर का सकेंत हो सकता है।

हार्मोन थेरेपी से होने वाले स्तन कैंसर का विवरण
मीनोपॉज हार्मोन थेरेपी का कभी सामना नहीं करने वाली 50 से 69 साल की 100 महिलाओं में से 6.3 फीसद में स्तन कैंसर का खतरा पाया गया। जबकि विभिन्न हार्मोन थेरेपी कराने वाली इसी आयुवर्ग की 100 महिलाओं में यह खतरा 7.7 से लेकर 8.3 फीसद तक पाया गया। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता गिलियन रीव्स ने कहा, ‘एमएचटी के लंबे समय तक इस्तेमाल से उच्च खतरा हो सकता है। पांच साल की तुलना में दस साल तक एमएचटी के उपयोग के कारण स्तन कैंसर का खतरा दोगुना तक हो सकता है।

क्या है हार्मोन थेरेपी
हार्मोन थेरेपी को हार्मोन मेडिकल उपचार के लिए किया जाता है। इसके अलावा कहा जाता है कि जन महिलाओं को महावारी में दिक्कतों को सामना करना पड़ता है वह इस थेरेपी को लेती हैं। इसको एमएचटी भी कहते हैं। कई महिलाएं इस थेरपी से महावारी की समस्यों से निजात पाने के लिए ये थेरेपी लेती हैं।