यूक्रेन युद्ध पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका में कुपोषण का खतरा बढ़ा रहा :यूनिसेफ

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यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के चलते पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका में लाखों बच्चों के कुपोषण का खतरा बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी ने बृहस्पतिवार को यह कहा।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कहा है कि परिवार रमजान के महीने के दौरान भोजन जुटाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं, जब मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं और सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कुछ खाते-पीते नहीं हैं।
पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका के देश रूस-यूक्रेन युद्ध से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। वहीं, गरीबी और कोरोना वायरस महामारी ने चीजें बदतर कर दी हैं।
यूक्रेन और रूस विश्व का एक तिहाई गेहूं और जौ निर्यात करते हैं, जिस पर पश्चिम एशिया के देश अपने लाखों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए निर्भर हैं। दोनों युद्धरत देश अन्य अनाज और सूरजमुखी बीज से बने तेल के भी शीर्ष निर्यातक हैं।
यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो यह क्षेत्र में, खासतौर पर मिस्र, लेबनान, लीबिया, सूडान, सीरिया और यमन में बच्चों को बुरी तरह से प्रभावित करेगा। दरअसल, ये देश संघर्षों का सामना कर रहे हैं और यूरोप में युद्ध शुरू होने से पहले से वे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका के लिए यूनिसेफ की क्षेत्र निदेशक एडले खोद्र ने कहा, ‘‘कुपोषित बच्चों की संख्या अत्यधिक बढ़ने की संभावना है। ’’
पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका अपने यहां उपभोग की जाने वाली खाद्य सामग्री का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करते हैं। यूनिसेफ के अनुसार, क्षेत्र में केवल 36 प्रतिशत बच्चों को आहार मिल पार है जो उनके स्वास्थ्यकर रूप से विकास करने के लिए जरूरी है।

एपी