एनडीए के बढ़त पर महागठबंधन को ऐतराज

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Source: DNA India

विधानसभा चुनाव परिणाम के पहले बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में जिस प्रकार एक धुंध सी छाई थी वह धीरे-धीरे छंटने लगी है। सुबह राज्य के किसी भी प्रमुख दल के नेता आज राजनीतिक रूप से पार्टी कार्यालय में उपस्थित नहीं थे, लेकिन जैसे- जैसे सूरज ढलता गया पार्टी कार्यालयों और कार्यकर्ताओं में जोश दिखने लगा।

जो कार्यकर्ता सुबह तक चुप थे वो परिणाम आने के साथ जीत का दावा करने लगे। भाजपा कार्यालय में तो खूब गुलाल- अबीर भी उड़े। उधर जदयू कार्यालय में जमकर पटाखे छोड़े गए। रविवार को तीसरे और अंतिम चरण के मतदान समाप्त होने के बाद से टीवी चैनलों पर जो एग्जिट पोल दिखाए गए नतीजा उससे ठीक उल्टा आता दिखा।
एग्जिट पाल में जहां विपक्ष में बैठे महागठबंधन की सत्ता में वापसी होती दिखाई गई और बिहार में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए को विपक्ष की भूमिका में दिखने की संभावना बताया गया। हालांकि विभिन्न चैनलों पर दिखाए गए सर्वेक्षणों पर राज्य के सत्तारूढ़ भाजपा- जनता दल यूनाइटेड के कार्यालय में बहस छिड़ी थी और विपक्षी महागठबंधन के सबसे बड़े दल राजद के कार्यालय में खुशफहमी दिख रही थी।

जदयू पार्टी के कार्यकर्ता संजय कुमार का कहना है कि सर्वेक्षण में सारे युवा मतदाताओं को महागठबंधन के साथ दिखाया गया है। जमीन पर यह स्थिति नहीं है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि मतदान जातिय आधार पर हुआ है। दोनों तर्क विरोधाभासी हैं।

वहीँ रविरंजन कुमार पहले सर्वेक्षण के तरीके पर सवाल उठाते हैं। वहीँ बहस को आगे बढाते हैं और कहते हैं कि अगर मतदान के बढ़ते प्रतिशत का कारण विकास मुद्दा होता तो भी आगे नीतीश कुमार ही रहते। प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल में बहुत कुछ किया है।

सभी पार्टी जीत के समर्थन में अपनी- अपनी दलील पेश कर रही हैंं। वैसे तो एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की लड़ाई साफ़ झलकती है लेकिन, इसके बावजूद प्रदेश के सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर में कार्यकर्ताओं के बीच दोपहर बाद गजब का उत्साह दिखने लगता है।